हिंदू हृदय सम्राट · जाटों का प्लेटो
13 फरवरी 1707 – 25 दिसंबर 1763 · सिंसिनवार जाट · भरतपुर साम्राज्य के शिखर
पूर्ण English जीवनी प्रतियोगिता सिलेबसमहाराजा सूरजमल — जन्म नाम सुजान सिंह — अठारहवीं शताब्दी के उत्तर भारत के सर्वोच्च जाट शासकों में गिने जाते हैं। उन्होंने भरतपुर को क्षेत्रीय शक्ति बनाया जिसकी किलेबंदी, कूटनीति और विजय आज भी युवाओं को सिखाती है।
उन्हें हिंदू हृदय सम्राट और “जाट जाति का प्लेटो” कहा गया — राजनीतिक सूझबूझ, धैर्य और स्पष्ट दृष्टि के लिए। जाट आर्मी के लिए वे मौसमी नारा नहीं, संपूर्ण पाठ्यक्रम हैं।
जन्म: 13 फरवरी 1707। पिता: राजा बदन सिंह, माता: रानी देवकी। गोत्र: सिंसिनवार। विस्तृत गोत्र मानचित्र: जाट गोत्र सूची।
बदन सिंह की दृष्टि क्षीण होने पर सूरजमल ने राज्य कार्य संभाला (~1750)। औपचारिक राजतिलक 23 मई 1755 को दीग में। दीग केवल समारोह नहीं — संस्कृति के साथ शक्ति का चेहरा था।
प्रभाव आज के राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली के निकट क्षेत्रों — आगरा, अलवर, अलीगढ़, मथुरा, रोहतक, फरीदाबाद आदि — तक फैला। सफलता सैनिक संख्या से अधिक रसद, किले और साम्राज्य पतन की सही पढ़त से आई।
केवल योद्धा नहीं — राजस्व, व्यापार मार्ग सुरक्षा, गठबंधन। किलेबंदी नीति थी: जो घेराबंदी झेल सके वह अराजकता का मौसम भी झेल सके।
25 दिसंबर 1763 को हिंडन क्षेत्र में रोहिल्ला संघर्ष में वीरगति। कुसुम सरोवर, गोवर्धन पर विशाल छतरी — रानियों की छतरियों सहित — जाट परिवारों की तीर्थ-स्मृति। मूर्ति स्थल: मूर्ति स्थापना पृष्ठ।
पूर्ण अंग्रेज़ी विश्वकोश, युद्ध पृष्ठ, विरासत मानचित्र और प्रतियोगिता के 20 जीवनी प्रश्न:
Surajmal Encyclopedia Deep Biography