यह न्यास विलेख (Trust Deed) आज दिनांक ____________________ को स्थान खैर, तहसील - खैर, जिला - अलीगढ़, राज्य - उत्तर प्रदेश में निम्नलिखित पक्षों के मध्य निष्पादित एवं पंजीकृत किया गया:
प्रथम पक्ष — संस्थापक / मुख्य संरक्षक (SETTLOR / FOUNDER):
श्री शेर सिंह डागुर (Mr. Sher Singh Dagur), आत्मज स्व. श्री छिद्दा सिंह (Late Mr. Chhidda Singh), आयु लगभग _____ वर्ष, निवासी: ग्राम - भमरोला, पोस्ट - करनपुर, तहसील - खैर, जिला - अलीगढ़, उत्तर प्रदेश - 202142 (पहचान पत्र / आधार संख्या: [Aadhaar Redacted]), जिन्हें आगे इस विलेख में "संस्थापक/Settlor" कहा जाएगा (जिसमें उनके वैध उत्तराधिकारी व प्रतिनिधि शामिल माने जाएंगे)।
द्वितीय पक्ष — प्रथम न्यासीगण एवं पदाधिकारी (FIRST TRUSTEES & OFFICE BEARERS):
- श्री शेर सिंह डागुर (Mr. Sher Singh Dagur) — संस्थापक / मुख्य संरक्षक (Settlor / Founder / Trustee 1)
आत्मज स्व. श्री छिद्दा सिंह, निवासी: ग्राम - भमरोला, पोस्ट - करनपुर, तहसील - खैर, जिला - अलीगढ़, उत्तर प्रदेश - 202142
- श्रीमती लौंग श्री देवी (Mrs. Long Shree Devi) — उपाध्यक्ष (Vice President / Trustee 2)
कलत्र श्री शेर सिंह डागुर, निवासी: ग्राम - भमरोला, पोस्ट - करनपुर, तहसील - खैर, जिला - अलीगढ़, उत्तर प्रदेश - 202142
- श्री कृष्ण कुमार डागुर (Mr. Krishan Kumar Dagur) — महासचिव (General Secretary / Trustee 3)
आत्मज श्री शेर सिंह डागुर, निवासी: ग्राम - भमरोला, पोस्ट - करनपुर, तहसील - खैर, जिला - अलीगढ़, उत्तर प्रदेश - 202142
- श्री समय सिंह (Mr. Samay Singh) — कोषाध्यक्ष (Treasurer / Trustee 4)
आत्मज श्री शेर सिंह डागुर, निवासी: ग्राम - भमरोला, पोस्ट - करनपुर, तहसील - खैर, जिला - अलीगढ़, उत्तर प्रदेश - 202142
- श्रीमती चिंकी चौधरी (Mrs. Chinki Chaudhary) — सचिव - क्षेत्र संचालन एवं कार्यक्रम समन्वय (Secretary - Field Operations & Program Coordination / Trustee 5)
कलत्र श्री कृष्ण कुमार डागुर, निवासी: ग्राम - भमरोला, पोस्ट - करनपुर, तहसील - खैर, जिला - अलीगढ़, उत्तर प्रदेश - 202142
(उपरोक्त सभी प्रथम पक्ष एवं द्वितीय पक्ष सामूहिक रूप से "न्यास मंडल" या "Trustees" कहलाएंगे।)
जहाँ संस्थापक का परम उद्देश्य सनातन हिंदू धर्म, भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं, सामाजिक उत्थान, शिक्षा, गौसेवा, चिकित्सा सहायता, महिला व बाल कल्याण, राष्ट्रहित एवं समाज के निर्धन व असहाय वर्गों के सर्वांगीण विकास हेतु एक स्थायी सार्वजनिक धर्मार्थ (Public Charitable) एवं धार्मिक (Religious) न्यास की स्थापना करना है;
और जहाँ संस्थापक महाराजा सूरजमल जी के तेजस्वी जीवन, वीरता, न्यायप्रियता व राष्ट्रभक्ति को जन-जन तक पहुँचाने हेतु प्रतिबद्ध हैं;
अतः संस्थापक द्वारा अपनी स्वेच्छा से इस न्यास की स्थापना की जाती है, जिसका अभिधान (नाम) होगा:
"हिंदू धर्मरक्षक महाराजा सूरजमल सेवा ट्रस्ट"
(HINDU DHARMRAKSHAK MAHARAJA SURAJMAL SEVA TRUST)
न्यास का पंजीकृत मुख्य कार्यालय निम्नलिखित पते पर स्थापित रहेगा:
ग्राम - भमरोला, पोस्ट - करनपुर, तहसील - खैर, जिला - अलीगढ़, उत्तर प्रदेश - 202142।
न्यास मंडल के बहुमत के निर्णय से न्यास की शाखाएँ अथवा कार्यालय भारत के किसी भी अन्य स्थान पर स्थापित/स्थानांतरित किए जा सकेंगे, बशर्ते लागू विधिक नियमों का पालन किया जाए।
- यह न्यास पूर्णतः सार्वजनिक, धार्मिक एवं धर्मार्थ (Public Charitable and Religious Trust) प्रकृति का रहेगा।
- यह न्यास पूर्ण रूप से गैर-लाभकारी (Non-Profit Organization) आधार पर संचालित होगा।
- निजी लाभ पर पूर्ण प्रतिबंध: न्यास की समस्त संपत्तियों एवं आय का उपयोग केवल और केवल इसके विधिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किया जाएगा। न्यास की आय या संपत्ति का कोई भी भाग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी न्यासी (Trustee), संस्थापक (Settlor) या उनके परिजनों के व्यक्तिगत लाभ, लाभांश या वितरण हेतु प्रयोग नहीं होगा। केवल वास्तविक कार्य/सेवाओं के विधिक खर्चों का पुनर्भुगतान अनुमत होगा।
न्यास निम्नलिखित 10 प्रमुख लोककल्याणकारी व धार्मिक उद्देश्यों को पूरा करने हेतु प्रतिबद्ध रहेगा:
5.1 सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति का संरक्षण
सनातन हिंदू धर्म, वैदिक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं व आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार करना। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, श्रीमद्भगवद्गीता व पुराणों के अध्ययन को प्रोत्साहन देना तथा धार्मिक कार्यक्रम, कथा, सत्संग, प्रवचन, यज्ञ व आध्यात्मिक शिविर आयोजित करना।
5.2 महाराजा सूरजमल जी की ऐतिहासिक विरासत का प्रसार
महाराजा सूरजमल जी के जीवन, अदम्य वीरता, न्यायप्रियता, राष्ट्रहित एवं सामाजिक मूल्यों का जन-जन में प्रचार करना। उनके योगदान पर पुस्तकें, शोध सामग्री, व्याख्यान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना तथा युवाओं में साहस, अनुशासन व राष्ट्रसेवा की भावना जागृत करना।
5.3 शिक्षा, छात्र सहायता एवं भारतीय ज्ञान परंपरा
निर्धन व जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, पुस्तकें, स्टेशनरी, फीस व शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना। पुस्तकालय, वाचनालय, अध्ययन केंद्र, ई-लर्निंग व प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन केंद्र स्थापित करना तथा संस्कृत व हिंदी शिक्षा को बढ़ावा देना।
5.4 निर्धन, असहाय व आपदा पीड़ितों की सेवा
निराश्रित, दिव्यांग, वृद्ध एवं अत्यंत गरीब व्यक्तियों को भोजन, वस्त्र, दवाइयां व आवश्यक सहायता देना। निर्धन परिवारों की कन्याओं के विवाह में यथासंभव आर्थिक व सामाजिक सहायता प्रदान करना तथा प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य चलाना।
5.5 गौसेवा एवं जीवदया
गौशालाओं की स्थापना, संचालन व सहयोग करना। असहाय, बीमार व दुर्घटनाग्रस्त गौवंश व अन्य पशुओं के उपचार, एम्बुलेंस व संरक्षण की व्यवस्था करना तथा पशु-पक्षियों हेतु जल व चारे का प्रबंध करना।
5.6 निःशुल्क चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा
निःशुल्क/रियायती स्वास्थ्य जांच शिविर, रक्तदान शिविर, नेत्र जांच शिविर तथा स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना एवं असाध्य रोगों से पीड़ित गरीब व्यक्तियों को चिकित्सीय सहायता देना।
5.7 महिला अधिकार एवं बाल कल्याण
महिलाओं की शिक्षा, कौशल विकास (सिलाई, हस्तशिल्प, कंप्यूटर), आत्मनिर्भरता व सुरक्षा हेतु कार्य करना। अनाथ व जरूरतमंद बच्चों हेतु पोषण, शिक्षा व संस्कार केंद्र स्थापित करना।
5.8 राष्ट्रसेवा, सामाजिक जागरूकता एवं पर्यावरण संरक्षण
राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सौहार्द व नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता फैलाना। वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान तथा पर्यावरण संतुलन हेतु निरंतर कार्य करना।
5.9 धार्मिक एवं सामाजिक संस्थानों का सहयोग
मंदिरों, गौशालाओं, आश्रमों, धार्मिक शिक्षण संस्थानों व प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण व प्रबंधन में वैधानिक रूप से सहयोग प्रदान करना।
5.10 संस्कार, योग एवं चरित्र निर्माण
युवाओं व बालकों हेतु संस्कार शिविर, योग, ध्यान, प्राणायाम व नैतिक शिक्षा के कार्यक्रम आयोजित करना तथा सत्य, सेवा, अनुशासन, सदाचार व राष्ट्रहित के मूल्यों को सुदृढ़ करना।
- प्रारंभिक स्थायी निधि (Initial Corpus Fund): संस्थापक द्वारा इस न्यास के गठन हेतु अपनी स्वेच्छा एवं निजी कोष से ₹ 11,00000/- (रुपये ग्यारह लाख मात्र) की नकद राशि न्यास को समर्पित की गई है, जो न्यास की प्रारंभिक स्थायी निधि होगी।
- समस्त पंजीकृत अचल/चल संपत्तियां (Inclusion of Member Properties): न्यासियों/सदस्यों के नाम पर पंजीकृत समस्त ऐसी चल एवं अचल संपत्तियां, जिन्हें विधिक सहमति पत्र (Consent Deed / Transfer Deed) अथवा दान पत्र द्वारा इस न्यास के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु न्यास के नाम समर्पित किया गया है या आगे हस्तांतरित किया जाएगा, वे सभी विधिक रूप से न्यास की संपत्ति का अभिन्न अंग मानी जाएँगी।
- न्यास की समस्त संपत्तियां केवल और केवल "हिंदू धर्मरक्षक महाराजा सूरजमल सेवा ट्रस्ट" के नाम से ही धारण एवं संचालित की जाएंगी।
- सदस्य संख्या सीमा: न्यास मंडल में न्यूनतम 3 (तीन) तथा अधिकतम 21 (इक्कीस) न्यासी होंगे। वर्तमान में न्यास मंडल में कुल 5 प्रथम न्यासी हैं।
- नियमों के अनुसार नए न्यासियों का संयोजन (Admission of New Trustees): भविष्य में न्यास के सुचारू संचालन हेतु नए न्यासियों/सदस्यों को न्यास के नियमों व विधिक प्रक्रियाओं के अनुसार न्यास मंडल के बहुमत (Majority Resolution) से जोड़ा जा सकेगा।
- न्यासियों के अधिकार एवं कर्तव्य:
- संस्थापक/मुख्य संरक्षक: न्यास की मूल विचारधारा, नीतियों व दीर्घकालिक योजनाओं का मार्गदर्शन करेंगे।
- उपाध्यक्ष: अध्यक्ष/संरक्षक की अनुपस्थिति में उनके समस्त दायित्वों का निर्वहन करेंगे।
- महासचिव: न्यास के प्रशासनिक संचालन, पत्राचार, बैठकों के आयोजन तथा कार्यवाही विवरण (Minutes Book) सुरक्षित रखने हेतु उत्तरदायी होंगे।
- कोषाध्यक्ष: वित्तीय लेखे-जोखे, रोकड़ बही (Cash Book), बैंक खातों व लेखा-परीक्षण (Audit) हेतु पूर्णतः जिम्मेदार होंगे।
- सचिव (क्षेत्र संचालन): न्यास के मैदानी कार्यक्रमों, सामाजिक/धार्मिक शिविरों व जमीनी गतिविधियों का समन्वय करेंगी।
- बैठक एवं कोरम: न्यास मंडल की बैठक प्रत्येक 3 माह में कम से कम एक बार आयोजित होगी। बैठक हेतु कुल न्यासियों के न्यूनतम 51% सदस्यों की उपस्थिति (Quorum) अनिवार्य होगी।
- न्यास के नाम से बैंक खाता किसी भी राष्ट्रीयकृत अथवा अनुसूचित बैंक (Scheduled Bank) में खोला जाएगा।
- संयुक्त बैंक खाता संचालन (Joint Bank Operations): बैंक खाते का संचालन न्यास के निम्नलिखित तीन अधिकृत पदाधिकारियों में से किन्हीं दो (2) के संयुक्त हस्ताक्षरों (Joint Signatures) द्वारा विधिक रूप से किया जाएगा:
a) श्री शेर सिंह डागुर (संस्थापक / मुख्य संरक्षक)
b) श्री कृष्ण कुमार डागुर (महासचिव)
c) श्री समय सिंह (कोषाध्यक्ष)
- वित्तीय वर्ष एवं लेखा परीक्षा (Audit): न्यास का वित्तीय वर्ष प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल से प्रारंभ होकर 31 मार्च तक होगा। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा न्यास के खातों का अनिवार्य ऑडिट कराया जाएगा।
- यह न्यास पूर्णतः सार्वजनिक एवं अपरिवर्तनीय (Irrevocable) है। संस्थापक या कोई भी न्यासी न्यास की संपत्तियों को व्यक्तिगत उपयोग हेतु वापस नहीं ले सकता।
- विघटन की स्थिति में: यदि किसी भी कारणवश न्यास का विघटन आवश्यक होता है, तो न्यास की समस्त बची हुई संपत्तियां किसी भी न्यासी या उनके परिजनों में वितरित नहीं होंगी, बल्कि आयकर अधिनियम व सार्वजनिक न्यास अधिनियम के अनुसार समान उद्देश्यों वाले किसी अन्य पंजीकृत सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास या सरकार को हस्तांतरित कर दी जाएँगी।
| क्र.सं. |
संपत्ति का प्रकार |
विवरण एवं मान / स्थिति |
| 1 |
प्रारंभिक स्थायी नकद कोष (Corpus Fund) |
₹ 11,00000/- (रुपये ग्यारह लाख मात्र) - संस्थापक द्वारा समर्पित नकद/बैंक राशि। |
| 2 |
न्यासियों/सदस्यों के नाम पंजीकृत संपत्तियां |
समस्त ऐसी चल/अचल संपत्तियां जो सदस्यों के नाम पंजीकृत हैं और जिन्हें न्यास के उद्देश्यों हेतु विधिक रूप से हस्तांतरित/समर्पित किया गया है। |
हम सभी पक्षकार यह घोषणा करते हैं कि हमने इस न्यास विलेख के समस्त नियमों, शर्तों एवं उद्देश्यों को भली-भांति पढ़ व समझकर, बिना किसी अनुचित दबाव के, पूर्ण होश-हवाश में अपने हस्ताक्षर निष्पादित किए हैं।
संस्थापक / मुख्य संरक्षक के हस्ताक्षर (SETTLOR):
श्री शेर सिंह डागुर
(संस्थापक / मुख्य संरक्षक)
प्रथम न्यासीगण के हस्ताक्षर (FIRST TRUSTEES):
1. श्रीमती लौंग श्री देवी
(उपाध्यक्ष)
2. श्री कृष्ण कुमार डागुर
(महासचिव)
3. श्री समय सिंह
(कोषाध्यक्ष)
4. श्रीमती चिंकी चौधरी
(सचिव - क्षेत्र संचालन)
साक्षियों (गवाहों) के हस्ताक्षर एवं विवरण (WITNESSES):
गवाह 1:
हस्ताक्षर: _______________________
नाम: ___________________________
पिता का नाम: ____________________
पता: ___________________________
आधार/पहचान पत्र: ________________
गवाह 2:
हस्ताक्षर: _______________________
नाम: ___________________________
पिता का नाम: ____________________
पता: ___________________________
आधार/पहचान पत्र: ________________
उप-निबंधक (Sub-Registrar) पंजीकरण हेतु महत्वपूर्ण कानूनी निर्देश:
- स्टाम्प ड्यूटी: उत्तर प्रदेश राज्य के नियमों अनुसार उचित मूल्य के स्टाम्प पेपर पर इसे प्रिंट/टाइप कराएं।
- कार्यालय: तहसील खैर, जिला अलीगढ़ के Sub-Registrar कार्यालय में पंजीकृत कराएं।
- आवश्यकताएँ: सभी न्यासियों व 2 गवाहों के मूल आधार कार्ड, पैन कार्ड तथा पासपोर्ट साइज फोटो अनिवार्य हैं।